चीनी मिल से परेशान हैं स्थानीय गन्ना किसान

बिहार में जो चीनी मिलें बाकी बची हैं उनमें से तिरुपति चीनी मिल एक है. यह मिल तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत बगहा विधानसभा क्षेत्र में है. लेकिन इससे स्थानीय किसानों को कोई ख़ास फायदा नहीं हो रहा है.

स्थानीय किसानों की शिकायत है कि मिल मालिक उनके साथ सौतेला बर्ताव करते हैं. उनके मुताबिक़ बाहर के बिचौलियों और दलालों की बातों पर मिल मालिक अधिक ध्यान देते हैं.

agriculture - bagaha1बगहा विधानसभा क्षेत्र के सेमरा गाँव के कई किसानों ने तिरुपति चीनी मिल पर आरोप लगया कि वह स्थानीय किसानों की बजाय बाहर से आए दलालों का गन्ना पहले खरीदती है और साथ ही उनका भुगतान भी समय से करती है.

सेमरा के किसान शिवशंकर प्रसाद गुप्ता ने कहा:“ तिरुपति चीनी मिल से हम स्थानीय किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है. मिल हम लोगों के साथ सौतेला बर्ताव कर रही है, जो गन्ना उतर प्रदेश, नरकटिया, नेपाल आदि जगहों से आता है उसे पहले खरीदा जाता है और उनका पूरा भुगतान भी समय से होता है किन्तु हमारा गन्ना धरा का धरा रह जाता है. मिल हमारे गन्ने को अंतिम समय में सस्ते दामों में खरीदती है और उसका भी भुगतान साल दो साल बाद थोड़ा-थोड़ा करके किया जाता है.”

सेमरा के एक दूसरे निवासी मोनोज कुमार मिश्र ने आरोप लगाया: “कंपनी के पास लगभग सभी किसानों का बकाया है किन्तु कंपनी भुगतान नहीं कर रही है. हम अपनी पूरी जमीन पर केवल गन्ना ही उपजाते हैं जिसे बेच कर हमारा घर चलता है. लेकिन मिल के रवैया से हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी होने की बजाय ख़राब हो गई है. कोई चारा न होने के कारण हमें अपना गन्ना उधार ही में देना पड़ता है.”

इस बारे में स्थानीय निवासी सगीर अंसारी कहते हैं: “जब भी कोई कंपनी के खिलाफ आवाज़ उठाता है, उसको कंपनी अलग से बुलाकर उसका भुगतान कर देती है. लेकिन जो कमजोर किसान हैं उनकी कोई सुनने वाला नहीं है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमें भूखे ही मरना होगा.”

तिरुपति मिल के एक उच्च अधिकारी एस. एन. अहमद ने किसानों के आरोपों पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया. उनहोंने कहा: “जब हमारे बड़े साहब आएंगे तो आप उन्हीं से पूछ लीजिएगा.” मिल के दूसरे कर्मचारी भी इस बारे में कुछ बोलने से बचते रहे.

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