पटरी से उतरी पड़ी है विकास की गाड़ी

सारण जिला के मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र में विकास की गाड़ी को पटरी पर लाने की जो कोशिश शुरु हुई थी, उसपर वर्षों से विराम लगा हुआ है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि इस क्षेत्र में जितने कल कारखाने थे और जिनसे यहां के लोगों में एक आस जगी थी, वे सब दम तोड़ चुके हैं. मढ़ौरा के धनुकी चौक के निवासी एवं स्थानीय एस. के इंटर कॉलेज के शिक्षक प्रवीण कुमार मेहता कहते हैं कि इस क्षेत्र में चीनी मिल के आलावा टॉफी बनाने की भी एक फैक्ट्री थी, लेकिन वे सब बंद हो गईं. इसी के साथ मिलिट्री इंजीनियरिंग वर्कशॉप जहां सेना के लिए उपकरण बनाए जाते थे, उसने भी काम करना बंद कर दिया है.

प्रवीण मेहता बताते हैं कि यहां की चीनी मिल में पांच छे हज़ार लोग काम करते थे जो इसके बंद होने से बेरोजगार हो गए. इतना ही नहीं मिल मालिकों पर गन्ना किसानों का जो पैसा बकाया था उसे भी अदा नहीं किया गया. किसान पहले गन्ना की खेती करते थे तो उनकी आमदनी भी अच्छी होती थी, लेकिन अब उनका भी बुरा हाल है.

कभी रोज़गार का साधन और स्रोत बनने वाले यहां कल कारखाने आज निराशा का प्रतिक बन गए हैं. इनके बंद हो जाने से स्थानीय लोगों को लगता है जैसे विकास की देवी रूठ गई हैं. लोगों की सोच में यह निराशा उस समय उत्पन्न हुई जब राज्य में विकास की गाड़ी का पहिया उल्टा घूमने लगा. इसके लिए स्थानीय लोग अपने नेताओं के साथ ही राज्य सरकार को भी जिम्मेदार मानते हैं.

Share

Leave a comment

Your email address will not be published.


*