महिलाओं में आई है जागरूकता

बिहार के कोसी प्रमंडल क्षेत्र को राज्य के सबसे पिछड़े इलाकों में गिना जाता है. बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र होने के कारण यहां खेती बाड़ी भी ठीक ढंग से नहीं हो पाती है. उद्योग धंधे का तो इस क्षेत्र में कोई नाम ही नहीं है. यही कारण है कि अधिकतर लोग रोज़ी रोटी के लिए दूसरे शहरों या राज्यों में पलायन करते हैं. इस सब के बावजूद मह्लिलाओं में अपने अधिकार को लेकर जागरूकता आई है.
मर्दों के बाहर जाने से घर की सारी जिम्मेदारी महिलाएं अपने कंधों पर उठा रही हैं. घर के काम काज से लेकर खेती बाड़ी और यहां तक कि अनपढ़ होने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं. कोसी प्रमंडल के पड़ने वाले सिमरीबख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में कई महिलाओं ने बताया कि घर पर मर्दों के नहीं रहने से सब काम उन्हें ही देखना पड़ता है. लेकिन मजबूरी ही में सही वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कोताही नहीं कर रही हैं.
सिमरीबख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र के हरेवा गाँव की सीता देवी ने बताया कि उनके पति वर्षों से बाहर रहते हैं. साल में एक दो बार घर आते हैं. इसलिए मवेशी की देखभाल के साथ ही बच्चों की पढ़ाई पर उन्हें ही ध्यान देना पड़ता है. यही हाल उपेन्द्र साह का है. वो अधिकतर समय गाँव से बाहर रहते हैं लेकिन उनकी पत्नी ने घर को संभाला और आज उनका बेटा दीपक साह आईएससी करके आईआईटी की तयारी कर रहा है.
इन महिलाओं का कहना है कि गाँव के स्कूल में पढ़ाई बेहतर हो जाए तो स्थिति और भी सुधर सकती है. याद रहे की हरेवा में कमज़ोर और पिछड़े वर्गों की पहली पीढ़ी शिक्षा प्राप्त कर रही है और यह उन महिलाओं के कारण संभव हो पाया है जो अनपढ़ होने के बावजूद शिक्षा के महत्व को समझ रही हैं. महिलाओं में आई जागरूकता की एक मिसाल पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिली जिसमें उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. इसी के साथ यह भी स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि वे आज भी सामने आ कर अपनी बात रखने से कतराती हैं. अपनी सुरक्षा की दृष्टि से ये महिलाएं निश्चिंत हैं. इस क्षेत्र में महिला उत्पीड़न के मामले वैसे भी बहुत कम सुनने को मिलते हैं. महिलाएं बिना किसी चिंता के खेतों में काम करने जाती हैं और बाज़ार का काम भी खुद ही कर लेती हैं.

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