बाल बाल बचे गंगा के लिए अनशनरत स्वामी गोपाल दास

प्रशासन द्वारा ऋषिकेश से चंडीगढ़ अस्पताल में भर्ती कराने ले जाती उनकी एम्बुलेन्स ट्रक से भिड़ी

चंडीगढ़ के सीजीआई में भर्ती स्वामी गोपाल दास

हरिद्वार: 

गंगा के लिए विशेष कानून के मांग ले अनशनरत प्रो जी डी अग्रवाल उर्फ़ स्वामी सानंद के निधन के बाद से उनकी जगह उन्हीं के  मातृ सदन स्थित कमरे में  आमरण अनशन  पर बैठे स्वामी गोपाल दास को देर रात  ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से ले जा कर सी जी आई चंडीगढ़ में भर्ती करा दिया गया। गोपाल दास के साथी बबलू ने स्वामी के हरिद्वार स्थित आश्रम,मातृ सदन, को सूचना दी कि ऋषिकेश से चंडीगढ़ की यात्रा के दौरान उनकी एम्बुलेंस की    तीन बार टक्कर हुई और उसकी आखरी भिडंत तो एक तेज़ गति से आती ट्रक के हुई जिसमे एम्बुलेंस तो क्षतिग्रस्त हो गयी पर गोपाल दास चोटिल हो गए. इस भिडंत में डॉक्टर बाल बाल बच गए। इसके पहले मातृ सदन ने अपने whatsapp ग्रुप में आपत्ति जताई थी कि संत गोपाल दास जी को “उबर खाबड कच्ची सड़क से PGI chandigarh ले जाया जा रहा है”।

उनके एम्बुलेंस की टक्करों के बाद उनके समर्थक इसे एक साजिश मान रहे हैं. एक पत्रकार, श्वेता रश्मि ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा:  “#GD #अग्रवाल जी के बाद अब #संत #गोपाल दास जी को लेकर निकली एम्बुलेंस का 3 बार दुर्घटनाग्रस्त होना सामान्य नहीं हैं। GD अग्रवाल जी की हत्या की है ! और अब गोपाल दास मुनि के साथ षड्यंत्र । #गंगा की सफाई की मांग पर इतना खौफ़ क्यों और किन लोगों को है जरा खुल कर सामने तो आये?? संतो की लाश पर राजनीति अच्छी नहीं है।”

ज्ञात हो कि 13 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने गोपाल दास  को,  मातृ सदन से ज़बरन उठा कर एम्स में भरती कर दिया था पर 16 अक्टूबर को लगभग 12 बजे हरिद्वार प्रशासन उन्हें  वापिस  मातृ सदन लेकर आया। आश्रम पहुँच गोपाल दास ने जहां एक ओर 17  तारीख से संधारा की प्रक्रिया के शुरुआत की घोषणा की, वहीँ उन्होंने एक सनसनीखेज बयान दिया की एम्स के चिकित्सा अधीक्षक ने मातृ सदन पर अनशन के लिये उन्हें उकसाने का झूठा आरोप लगाने को कई बार प्रयास किया था। (देखें विडियो)

 

 

मातृ सदन को सुपुर्द करने के एक दिन बाद ही 17 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने  हरिद्वार स्थित मातृ सदन के इर्द गिद धारा 144 लगा दिया और स्वामी गोपाल दास को “ज़बरदस्ती” वापिस अस्पताल में भर्ती करने पहुँच गयी तो इसका पुरजोर विरोध करते हुए तो स्वामी ने अपने खून से एक पत्र लिख डाला।

समर्थकों की माने तो गोपाल दास को ज़बरन ले जाने के बाद एम्स प्रशासन ने रातभर सन्तगोपालदास को बिस्तर नहीं दिया  तथा उन्हें रातभर इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर रखा। परिणामस्वरूप 18 तारीख को संत गोपाल दास का स्वास्थ्य बिगड़ा ऋषिकेश एम्स ने उन्हें दिल्ली रेफर किया। उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही थी और पी जी आई चंडीगढ़ भेजने का फैसला लिया। इस फैसले का उनके समर्थकों ने पुरजोर विरोध किया और एक ने तो लिखा: “पहले दिल्ली एम्स रेफर करने की तैयारी विधानसभा अध्यक्ष के पहुंचने के बाद PGI चण्डीगढ़ भेजने का फैसला। यह साफ लगता है कि दिल्ली में राजनीतिक दबाव के चलते ऐसा किया गया सरकार इस मामले में डरी हुई है।”

इस सन्दर्भ में गोपाल दास ने नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिख डाला जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी “चिकित्सा कम” हो रही है और “मानसिक प्रतारणा” ज्यादा दी जा रही है तथा उन्हें “फुटबॉल” की तरह “जहां चाहा वहाँ धकेल दिया जा रहा है” ।

संत गोपाल दास के समर्थकों का मानना है कि उनको चंडीगढ़ भेजा जाना खतरनाक होगा , और उनके साथ मौजूद साथियो को सरकार द्वारा पोषित ऐसे किसी भी कदम का प्रत्यक्ष विरोध आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि “यहां इन परिस्थितियों के बाद अस्पताल और सरकार के इस तंत्र से असहयोग आंदोलन की भांति ही लड़ा जाना आंदोलन के लिए हितकारी होगा” ।

–जागृतबिहार ब्यूरो 

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1 Comment on बाल बाल बचे गंगा के लिए अनशनरत स्वामी गोपाल दास

  1. ज्ञानेंद्र रावत // October 22, 2018 at 3:16 pm // Reply

    सरकार स्वामी सानंद के समथॆन में किये जा रहे आंदोलन को कुचलने का भरसक प्रयास कर रही है। स्वामी गोपालदास जी को रिषीकेश से चन्डीगढ पीजीआई उबड़-खाबड़ रास्तों से ले जाते हुए एम्बुलैंस की तीन बार एक्सीडेंट का प्रयास, अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने और मां गंगा की अविरलता-निमॆलता के लिए अहिंसक संघषॆ करने वालों को मारने का षडयंत्र आपातकाल और तानाशाही के दौर का जीता-जागता सबूत है। यह इस बात का परिचायक है कि सरकार कुछ भी करे, उसके विरोध का खामियाजा तुम्हें जान देकर चुकाना होगा। यह सरकार मां गंगा के बेटे की सरकार नहीं है, गंगा को बबॊद और गंगा के भक्तों की हत्या करने वाली सरकार है। गंगा के लिए जो कानून का मसौदा केन्द्र सरकार लायी है, वह झूठ के पुलिंदे के अलावा कुछ नहीं है। वह झूठा इसलिए है कि उसमें स्वामी सानंद के गंगा कानून के मसौदे जैसा कुछ भी नहीं है। इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध किया जाये और जनता को जाग्रत किया जाये।

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