पानी का निजीकरण नहीं सामुदायिककरण होना चाहिए

सेनेगल में विश्वजल मंच 2021 के विरोध में जल सत्याग्रह का शुभारंभ हुआ

 

 

डॉ. राजेंद्र सिंह*

सेनेगल में सामाजिक नेताओं की बैठक में एकमत होकर पानी का निजीकरण नहीं सामुदायिककरण करने की मांग हुई है। अफ्रीका में जल संकट से देश उजड़ रहे हैं, लेकिन कंपनियां विश्वजल समिति द्वारा यहां एक जल उत्सव मनाने की तैयारी कर रही हैं। इस उत्सव के विरुद्ध लोगों में क्रोध बढ़ रहा है।

सेनेगल फ्रांस शासित अफ्रीकन देश था। फ्रांस में ही सबसे पहले जल का निजीकरण हुआ था। इसी देश में जल व्यापार की सबसे पुरानी और बड़ी कंपनियां मौजूद हैं। पुरानी विवन्डी, अववियालिया व स्वेज आदि सात कंपनियां ने दुनिया के जल पर कब्जा करने का प्रयास चला रखा है। पहले सेनेगल का जल प्रबंधन यहां का जल निगम करता था। अब स्वेज कंपनी करती है। यहां का जल बहुत महंगा है। खरीदकर पीना गरीब के लिए बहुत कठिन होगा। लोग दुःखी होकर आंदोलनरत हैं।

डकार मीटिंग में पपजोक नामक व्यक्ति ने आकर कहा स्वेज कंपनी में फ्रांस का तो बस एक ही मालिक है। शेष सभी तो सेनेगली हैं। अफ्रीकन है। इसलिए इस कंपनी ने सेनेगल को शुद्ध जल पिलाने का पैसा लेकर अच्छा काम किया है। इसके काम में बाधा पैदा करना ठीक नहीं है। मीटिंग में आए लोगों ने कहा हम तो विश्वजल मंच 2021 को यहां आयोजित होना चाहिए या नहीं यह बात कर रहे हैं। स्वेज के विषय में अभी नहीं फिर बात करेंगे। तब झगड़ा शांत हुआ। जोयल जोश फ्रांस से आए उन्होंने कहा गरीब सेनेगल को जल उत्सव द्वारा कर्जदार बना कर दुबारा कंपनियां पहले जैसा कलोनियल रूल कायम करना चाहती है। आप समझे इस जल उत्सव से किसे लाभ है? यह यहां क्यों आयोजित किया जा रहा है? आयोजित करने वाले कौन हैं? आदि सवाल पूछे। ममांडू इस बैठक का संचालन कर रहा था। इन सवालों पर चर्चा किए बिना ही चर्चा को आगे बढ़ाया।

सिद्धींग सार व कुभांजू ने एक आवाज में कहा इस जल उत्सव से हमारे देश को कोई लाभ नहीं है। इसे रोकना चाहिए। ऐसे उत्सव के आयोजन पर 34 मिलीयन खर्च करने की वजह इतना पैसा वर्षा जल संरक्षण करके जल उपलब्ध कराने पर खर्च करना चाहिए। शिक्षक संघ के नेता अक्लाईगई ने कहा हमारे देश के विद्यालयों में जल व्यवस्था नहीं है। बच्चे पानी मर रहे हैं। सरकार जल उत्सव क्यों मना रही है? हमें ऐसे उत्सव का विरोध करना अच्छा होगा। अन्यथा हमारी अगली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। अवाडू ने कहा हमें ‘जल अधिकार चाहिए दिखावा नहीं’ मनान्डू ने कहा हम सरकारी दिखावे के विरुद्ध इकट्ठे होकर विरोध करेंगे।

साली में अल्ट्रानेटिव फॉर्म आयोजन की बात में लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। मैंने इस बैठक में कहा हमारे लिए विकल्प समाधान नहीं है। 5 बार विकल्प सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं। इनका सार्थक परिणाम नहीं मिलता है। इसलिए ‘‘बेपानी लोग पानी उत्सव कैसे मनाए’’ इस सवाल को इस उत्सव आयोजक के सामने सरकार और जल समितियों से पूछना चाहिए।

अवाडू ने सेनेगल की खेती के संकट पर बोलते हुए कहा ‘‘यहां की टिकाऊ खेती अब बेपानी होकर नष्ट हुई है। कंपनियों के पानी से खेती नहीं हो सकती है। खेती के लिए सरकार विचार नहीं करती है। शहरों को पानी पिलाने की चिंता ही करती है। डकार को 340 किलोमीटर से मीठा जल लाकर पिलाती है। गांव प्यासे मर रहे हैं। अब प्यासे गांव ‘रवॉइसेर’ के युवा ने पाइप लाईन तोड़कर पानी पिया है। तभी सरकार व कंपनी ने सुना और गांव को पीने का पानी दिया।

इस काम को कराने वाली बहादुर महिला मुक्कल सीतली भी मीटिंग में मौजूद थी। इसने कहा इस देश में जब गरीब अपने जीवन-जीव हेतु कुछ करता है तो सरकार उसे हिंसा कहकर जेल में डालती है। लेकिन बड़ी-बड़ी कंपनियां लूटती हैं। उन्हें कभी दंडित नहीं करती हैं। इवयू मामे डियूरा, स्वेज, वियोलिया आदि कंपनियां लूट रही है। इनके विरुद्ध कुछ कार्रवाई सरकार ने नहीं की है।

जीवरिलग्र ने कहा हमें सेनेगल में जल सुरक्षा चाहिए। जल उत्सव नहीं चाहिए। हम सभी मिलकर इस का बायकॉट करे। संराई ने कहा सेनेगल में सरकार ने भूमि बड़ी-बड़ी कंपनियों को दी है। हम भू-अधिकार दिलाने के लिए लड़ रहे थे। अनानडु बोले ‘‘आज से हम जलाधिकार का आंदोलन शुरू कर रहे हैं’’ इस हेतु अक्टूबर में भारत जाकर जलाधिकार संघर्ष सत्याग्रह करना सीख कर आऊंगा।

जर्मनी की जूसी मोरी ने कहा इस देश को पेयजल के साथ खेती जल भी चाहिए। इसलिए जल उत्सव नहीं जल संरक्षण एवं जल उपयोग दक्षता बढ़ाने वाला प्रशिक्षण चाहिए। हम ऐसा प्रशिक्षण देने की योजना तैयार करेंगे। ये भी राजस्थान भारत जाकर जल संरक्षण के सामुदायिक प्रबंधन सीकर आऊंगी। इन्हीं चर्चाओं के बीच बैठक का संचालन कर रहे ममांडू ने चर्चा को निर्णय पर पहुंचे बिना ही समापन कर दिया।

बैठक के बाद मैंने कोर समूह में अपने सवाल उठाए। इस उत्सव का सेनेगल (अफ्रीका) को क्या लाभ होगा? इससे यहां की पेयजल सिंचाई या उद्योगों को जल उपलब्धता होगी? इस जल उत्सव से क्या लाभ और हानि है? इसे कौन कर रहा है?

संयुक्त राष्ट्र संघ जब ऐसे सम्मेलन करता है वह फीस नहीं लेता है। डकार जल मंच 2021 में 34 मिलियन खर्च होगा। इसमें से 4 मिलीयन यूरो केबल फीस भी देनी पड़ेगी। 30 मिलीयन यूरो आयोजन खर्च का समझौता हुआ है। इस कार्य को संयुक्त राष्ट्र अनुदान देगा या यह धनराशि कर्ज लेकर जुटानी होगी जवाब है। कर्ज लेकर सेनेगल सरकार इस आयोजन को कर रही है। कर्ज का कौन भुगतान करेगा। सेनेगल सरकार कर्जदार होगी। इसका अर्थ सेनेगल की जनता पर कर्ज बढ़ेगा। कर्ज जब चुकता नहीं तो परिणाम क्या होगा? इन सवालों पर गहरी चर्चा के बाद ममांडू ने अपनी गलती स्वीकार कर कहां ‘‘सेनेगल में जल निजीकरण के विरुद्ध काम करेंगे।’’

इस जल उत्सव की लूट से सेनेगल को बचाने का काम करेंगे, इस संकल्प के बाद इसे भारतीय सिरावस्त्र भेंट करके सम्मानित किया। बैठक में आई सभी नारियों को नीर बचाने के काम हेतु शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। नीर-नारी-नदी सम्मान की भारतीय परंपरा समझा कर जल सत्याग्रह का शुभारंभ सेनेगल में हुआ। उपस्थित दुनिया भर से आए जल संरक्षण कोर समूह ने जल निजीकरण व्यापारीकरण रोकने का संकल्प लेकर सभी की वापसी आरंभ हुई।

*लेखक जलपुरुष के नाम से विख्यात और मैग्सेसे तथा स्टॉकहोल्म वाटर प्राइज से सम्मानित पर्यावरणविद हैं और यह इनके निजी विचार हैं।

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