गाज़ियाबाद-दिल्ली बॉर्डर पर किसानों और पुलिस जवानों की भिड़ंत

किसान नेताओं की गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात

नई दिल्ली/गाज़ियाबाद:भारतीय किसान यूनियन द्वारा 23 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2018 तक हरिद्वार टिकैत घाट से दिल्ली किसान घाट तक किसान क्रान्ति यात्रा के आखिरी दिन आज गांधी जयंती के दिन किसानों को दिल्ली में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस ने बल का प्रयोग किया।

इस यात्रा में देशभर के सभी राज्यों से हजारों किसान शामिल थे जो लम्बे समय से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने एवं भाव व कर्जमाफी के सवाल पर आन्दोलनरत् है।

आज सवेरे जब सैकड़ों की तादाद में किसान गाज़ियाबाद से दिल्ली बॉर्डर पर पहिंचे तो उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर केनन , अश्रु गैस और लाठी चार्ज का सहारा लिया जिसमे काफी किसान जख्मी हुए।

गौरतलब है कि आज ही अहिँसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। शास्त्री ने तो जय जवान जय किसान का नारा दिया था।

जहां किसानों और जवानों की भिड़ंत हो रही थी, वहीं गृह मंत्री ने आनन फानन में किसान नेताओं के साथ एक आपात बैठक की और सूत्रों के अनुसार सरकार शीघ्र किसानों की मांगों पर अपना रुख साफ करेगी।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के अनुसार सरकार के चार साल पूरे हो जाने के बाद भी जगह-जगह खड़े हो रहे किसान आन्दोलन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गम्भीर नहीं है।

“सरकारी रिपोर्ट के अनुसार किसान खेती छोड़ रहे हैं। किसानों की आत्महत्यायें रूकी नहीं है, बल्कि बढ़ रही है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य न मिलने के कारण कर्ज का भार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित में न होकर बीमा कम्पनियों के हित में कार्य कर रही है। देश के गन्ना किसानों पर लगभग 19 हजार करोड़ रुपया गन्ना सीजन बन्द होने के बाद भी बकाया है। घोषणा पत्र में भारतीय जनता पार्टी ने 14 दिन में गन्ना भुगतान की बात कही थी। भारतीय जनता पार्टी का यह वादा भी किसानों के लिए जुमला ही साबित हुआ है। किसान के नाम पर बने एक आयोग की रिपोर्ट पिछले 15 साल से धूल चाट रही है। उसे लागू करना तो दूर आज तक उस पर संसद में चर्चा भी नहीं हुई। सरकारों द्वारा किसानों का उत्पीड़न जारी है,” टिकैत ने कहा।

भारतीय किसान यूनियन की एक विज्ञप्ति के अनुसार किसान क्रान्ति यात्रा की शुरूआत में लगभग 30 हजार किसान व 500 से अधिक ट्रैक्टर शामिल हुए। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, सैकड़ों की तादाद में किसान उसमे शामिल होते गए और यात्रा में 50 हजार से अधिक किसान जुड़ गए थे और यह काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर “अनुशासित तरीके से” दिल्ली के लिए कूच कर रहा था। इस यात्रा की एक विशेषता यह भी थी कि यात्रा में बच्चो से लेकर बुजुर्ग, नौजवान एवं महिलाएं भी शामिल थे जिनके लिए हर गांव के सामने खाने की व्यवस्था का पूरा प्रबन्ध किया गया था।

-jagribihar ब्यूरो

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