क्या पानी का नियंत्रण निजी विदेशी औद्योगिक घरानों के हाथों में होगा ?

नदी घाटी प्रंबधन विधेयक 2018 के प्रस्तावित प्रारूप पर प्रख्यात पर्यावरणविद जल पुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह को है आपत्ति

बुंदेलखंड में टीकमगढ़ जिले के बंगनी गाँव में चंदेला कालीन बुद्ध सागर तालाब फोटो: दीपक पर्वतियार

-श्वेता रश्मि*

नई दिल्ली: राज्यों के पानी के अधिकार संबंधी कानून को कमजोर करने के साथ ही पानी को अब निजीकरण के रास्ते पर डालने की कवायद? क्या पानी का नियंत्रण निजी घरानों के हाथों में होगा?

प्रस्तावित नदी घाटी प्रंबधन विधेयक 2018 की प्रतिलिपि

इस संदर्भ में दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने मीडिया के द्वारा लोगों तक अपनी बात रहते हुए बताया कि यदि ऐसा हुआ तो देश के फेडरल स्वरूप पर ये सवालिया निशान है , हालांकि संविधान के अनुसार आर्टिकल 262 के हिसाब से केंद्र सरकार को ऐसा करने का प्रावधान है इसमें राज्यों के अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (IRWD अधिनियम) उपयोग में आने वाले जल विवादों को हल करने के लिए केंद्र को समय समय पर इससे संबंधित कानून बनाने का प्रावधान देता है इसमें हालिया संशोधन वर्ष 2002 में हुआ जब कावेरी जल विवाद अपने चरम पर था।

शुक्रवार को नई दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते जलपुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह -फोटो सौजन्य सत्य प्रकाश सभरवाल

राजेन्द्र सिंह ने भारत सरकार के द्वारा रखे गये नदी घाटी प्रंबधन के प्रस्तावित प्रारूप 2018 पर सवालिया निशान उठाते हुए ये कहा कि सरकार अंतराष्ट्रीय पानी उद्योग के दबाव में उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए ऐसा कदम उठाने जा रही है । उन्होंने कहा इसका फायदा विदेश के चुनिंदा बड़े पर विवादस्पद पानी का कारोबार करने वाले उद्योगों को मिलेगा। इस संदर्भ में 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में जन शक्ति जल शक्ति कार्यकम रखा गया है जिसमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित कई अन्य शिरकत करेंगे और भारत में बढ़ते बाढ़ और सूखे सहित पानी को पानी सुरक्षा अधिनियम बिल 2017 के सुझाव पर भी चर्चा और लागू करने पर बात की जाएगी।

हालांकि सदन में रखे गए नदी घाटी प्रबंधन बिल पर जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि हम राज्यों के अधिकार को नहीं बदलने जा रहे , इस बात का खंडन राजेन्द्र सिंह ने किया और साफ किया कि सरकार अपने प्रस्ताविक बिल को बड़ी चालाकी से रख रही हैं बिना निजीकरण और उसका जिक्र किये पर उसके मंसूबे ठीक नहीं। पानी को जब तक आम लोगों की तरफ से बचाने की कवायद नही होगी, जल साक्षरता पर चर्चा नहीं होगी तो हालात और बुरे होंगे आने वाले भविष्य के लिए। ये समुदायों की देन है कि भारत में पानी को पूजा जाता है , सरकार को इस दिशा में भी सोचना चाहिए। हमनें 18 राज्यों के मुख्यमंत्री को मिलकर चिट्ठी लिखकर इस दिशा में ध्यान आकर्षित किया है।

पानी को सहेजने के अलावा गंदे नाले और सीवर को हमें रोकने की जरूरत है जिससे नदिया गंदी ना हो और लोगों के प्यास बुझाने में कारगर सिद्ध हो।

*लेखिका नई दिल्ली स्थित पत्रकार हैं।

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1 Comment on क्या पानी का नियंत्रण निजी विदेशी औद्योगिक घरानों के हाथों में होगा ?

  1. If necessary technological measures for water recharging and incorrect habits of using water does not change then the statement may becomes a reality. Very earnest request that kindly take this issue sincerely and lets transform the crisis. #Naya Bharat#

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