कर्ज़ लेकर जल उत्सव आयोजित करना सेनेगल जैसे गरीब देश की सेहत के लिए उचित नहीं है

विश्व जल संकट पर जल पुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह का विशेष आलेख भाग -1

डॉ. राजेन्द्र सिंह*

जल निजीकरण को रोक कर सामुदायिकरण करने हेतु जल को समझने, सहेजने और समझाने वाली जल-साक्षरता पूरी दुनिया में फैलाने की लक्ष्य सिद्धि हेतु 3 सदस्यीय समूह ने इस काम का शुभारम्भ सेनेगल (अफ्रीका) की राजधानी डाकर से शुरू किया है। इस 20 जून को कम्पनियों का राज्य कायम करने वाली जल कम्पनियों की ‘‘किक ऑफ मीटिंग’’ ने डाकर में जाकर कहा ‘‘विश्व जल समिति‘‘ का लक्ष्य दुनिया में जल सुरक्षा की जल नीति बनाकर दुनिया भर की राष्ट्रीय सरकारों से जल सुरक्षा का कार्य कराना है। उस दिशा में यह समिति क्या कर रही है? सेनेगल जैसे देश में ‘विश्व जल सम्मेलन’आयोजित करने की फीस इस देश से नहीं लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्थानों से लेनी चाहिए। विश्व जल मंच-2021 के आयोजन की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र संघ को लेनी चाहिए। यह चार मिलियन डॉलर विश्वजल समिति को कर्ज़ लेकर दे रहा है। यह 30 मिलियन डॉलर आयोजन पर खर्च करेगा। यह न्याय संगत नहीं है। सेनेगल की जनता की इस माँग में हम भारत के लोग सेनेगल के साथ हैं। यह देश आगे बढ़ना चाहता है। इसलिए यहाँ विश्व सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। परन्तु कर्ज़ लेकर उत्सव आयोजित करना इस देश की सेहत के लिए उचित नहीं है। इस देश की सेहत ठीक रखने हेतु विश्वजल समिति को इस देश से फीस नहीं लेनी चाहिए।

इस देश और पूरे अफ्रीका एवं एशिया को जल-साक्षरता की जरूरत है। जल व्यापार की जरूरत नहीं है। सभी देश अपने जल का प्रबन्धन कैसे करें? यह समझना, जल सहेजना और जल उपयोग दक्षता बढ़ाकर कम जल खपत से अधिक उत्पादन बढ़ाने का काम करना सभी की जरूरत है। यह कार्य
लोकतान्त्रिक सरकार को करना चाहिए। सरकारों को अपने विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों को जल संरक्षण एवं जल उपयोग दक्षता वाले कार्यों को प्राथमिक काम मानकर करना होगा। तभी कोई देश पानीदार बनेगा। विश्वजल समिति का काम तो सरकारों को जल सुरक्षा हेतु सक्षम बनाने में मदद करना है, ग़रीब देशों को जल व्यापार से लाभ कमाना नहीं है। लेकिल यह संस्था लाभ कमाई हेतु सक्रिय नज़र आती है। वह सरकारों की क्षमता बढ़ाने का अपना मूल काम नहीं कर रही।

1997 मे मरकेश (मोरक्को) में इस संस्था के पहले मंच पर दुनिया की जन सुरक्षा कायम करने का लक्ष्य अब यह भूल गए हैं। इस किक ऑफ बैठक में अपने लक्ष्य को याद रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। किक ऑफ बैठक अफ्रीका के देशों को पानीदार बनाने का विचार करे। अफ्रीका में होने वाला मंच यदि अफ्रीका को पानीदार बनाने का काम नहीं करता है तो केवल इन देशों का खर्च बढ़ाने के लिए ‘विश्व जल मंच-2021’ का आयोजन उचित नहीं है। इन देशों के पास अपने पानी पर जीवित रहने का ज्ञान और कौशल था। उसे जल व्यापार खत्म कर रहा है। कृपया जल व्यापार नहीं, जीवन है। जल को जीवन बनाने की दिशा में ही काम होना जरूरी है। इस दिशा में भारत का अपना अनुभव है। जल व्यापार नहीं जीवन का सदाचार है। जल से जुड़कर सूखी, मरी नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। लोगों की ग़रीबी मिटाकर समृद्ध बनाया जा सकता है। अब यही काम करने के लिए ‘किक ऑफ’ करना चाहिए। डाकर की जल घोषणा से अफ्रीका को पानीदार बनाने का संकल्प दिखाई देगा तो दुनिया इस काम के साथ जुड़ेगी। यह डाकर ‘किक ऑफ बैठक’ की सफलता होगी।

*लेखक स्टॉकहोल्म वाटर प्राइज एवं मैगसेसे विजेता पर्यावरणविद हैं। यहां प्रकाशित लेख इनके उनके निजी विचार हैं।

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